क्या आप जानते है कि विश्व की सबसे प्रथम प्लास्टिक सर्जरी भारत में हुई थी ?

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क्या आप जानते है कि विश्व की सबसे प्रथम प्लास्टिक सर्जरी भारत में हुई थी ?

 

हम में से ज्यादातर लोगों को लगता है कि प्लास्टिक सर्जरी का अविष्कार देशों में हुआ है। जबकि ऐसा नहीं है। प्लास्टिक सर्जरी भारत की देंन है, और हाँ भारत में प्लास्टिक सर्जरी उपयोग आज से नहीं बल्कि प्राचीन काल से किया जा रहा है। हमारे वैद पुराणों में कई जगह प्लास्टिक सर्जरी की तकनीक का जिक्र पढ़ने को मिलता है।  सुश्रुत संहिता, शल्य तंत्र प्रधान और चरक संहिता काय चिकित्सा प्रधान ग्रन्थ है। इन ग्रंथो के रचयिता क्रमशः सुश्रुत और चरक है। आचार्य सुश्रुत को प्लास्टिक सर्जरी का पिता कहा जाता है।

आचार्य सुश्रुत के समय में आज की तरह आधुनिक चिकित्सा, प्रयोगशालाएं, यंत्र और सुविधाएँ नहीं थी। फिर भी अपने ज्ञान और लगन से उन्होंने विश्व की सर्वप्रथम व सफल प्लास्टिक सर्जरी की। सुश्रुत ने शल्य क्रिया, टूटी हुई हड्डी जोड़ने, मूत्र नली से पथरी निकलना शल्य क्रिया द्वारा प्रसव करना, तथा मोतियाबिन्द का इलाज जैसे कई कार्य किये थे! शायद उन्ही के कारण आज का मेडिकल साइंस सुदृढ़तापूर्वक खड़ा हैं।

सुश्रुतसंहिता को भारतीय चिकित्सा में विशेष स्थान दिया गया हैं। इसमें सर्जरी के विभिन्न पहलुओं और तकनीक को विस्तार से समझाया गया है। सर्जरी के लिए आचार्य सुश्रुत के पास अलग – अलग किस्म के लगभग 125 उपकरण थे।

 

किस तरह करते थे आचार्य सुश्रुत शल्य चिकित्सा (सर्जरी)

आचार्य सुश्रुत को लेकर एक कहानी बेहद प्रसिध्द है। कि एक बार आधी रात को आचार्य सुश्रुत को दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने मशाल हाथ में ली और दरवाजा खोला। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला तो देखा कि एक व्यक्ति सामने खड़ा है, और उसकी आँखों से आंसू बह रहे है, साथ ही उसकी नाक कटी हुई है । उस व्यक्ति ने दर्दभरी आवाज में आचार्य सुश्रुत से सहायता मांगी और कहा कि “मेरे साथ दुर्घटना घट गयी है  मुझे सहायता की आवश्यकता है। कृपया मेरी सहायता करें।“

आचार्य सुश्रुत तुरंत उसे एक साफ़-सुथरे कमरे में ले गये। और उन्होंने दिलासा देते हुए व्यक्ति से कहा कि “सब ठीक हो जायेगा, अब शांत हो जाओ!” उस कमरे की दीवार पर सर्जरी संबंधित उपकरण टंगे हुए थे। उन्होंने उस व्यक्ति को अपने वस्त्र उतरने और चेहरे को औषधीय मिले पानी से धोने को कहा और फिर उसे आसन पर बैठाया। उसे एक गिलास भरकर कुछ नशीला द्रव्य पीने को दिया और खुद उपचार की तैयारी करने लगे।

सुश्रुत ने एक पत्ते से उस व्यक्ति की नाक का नाप लिया। जिस के बाद उन्होंने दीवार से चाकू, चिमटी उतारी और उन्हें आग की लौ में गर्म किया। चाकू और चिमटी की मदद से व्यक्ति के गाल से एक मांस का टुकड़ा काटकर उसे उसकी नाक पर प्रत्यारोपित(Implant) कर दिया।

इस क्रिया में व्यक्ति को नशीले द्रव्य से दर्द का एहसास कम हुआ। जिसके बाद सुश्रुत ने बड़ी सावधानी से नाक पर टांके और औषधियों लगा कर पुनः आकार दे दिया। व्यक्ति को नियमित रूप से औषाधियां लेने को कहा और सुश्रुत ने उसे घर भेज दिया और उसे कुछ समय बाद वापस आने को कहा जिससे वह उसे देख सके।

कई साल पहले सुश्रुत द्वारा की गई क्रिया को, आज हम प्लास्टिक सर्जरी के नाम से जानते है। इसे पढने के बाद हम कह सकते है कि तब का विज्ञान आज के आधुनिक विज्ञान से अधिक विकसित था।

 

रायटर - उषा सिंह