कैसे एक सन्यासी भारत का सबसे बड़ा व्यापारी बना ?

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शीर्षक देख कर आप समझ ही गए होगें, कि हम बाबा रामदेव की बात कर रहें हैं। किसी ने ये बात कभी सोची भी नहीं होगी। कि तन पर भगवा रंग के कपड़े और पैरों में खडाऊं पहनने वाला एक योग गुरु बाबा रामदेव पूरी दुनिया में योग का डंका बजाएंगे और बेहद कम समय में अरबों खरबों की सम्पति कमा लेंगे। आज पूरी दुनिया में बाबा रामदेव के जितने आश्रम नहीं है, उसे ज्यादा तो इनपर लोग अध्ययन कर रहें है कि बाबा ने ये चमत्कार कैसे कर लिया?, इसके पीछे क्या राज है?

इस बात को जानने और समझने के लिए, आपको बाबा रामदेव के जीवन को अच्छे से जानना होगा।

बाबा रामदेव का जीवन-  

बाबा रामदेव का जन्म 25 दिसंबर 1965 को हरियाणा के बेहद साधारण परिवार में हुआ था। बाबा के माता पिता ने उनका नाम रामकिशन यादव रखा था, पर जब वो सन्यासी बने तब उन्होंने अपना पुराना नाम त्याग कर नया नाम बाबा रामदेव अपना लिया।

बाबा रामदेव का आधा शरीर लकवे (पैरालिसिस) से ख़राब हो गया था

कई लोगों और मीडिया का कहना है, कि बाबा रामदेव को आठ साल की उम्र में पैरालिसिस का अटैक आया था। जिससे उनके शरीर के बाएँ हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। इसका असर आज भी उनकी बायीं आंख पर दिखाई देता है। पैरालिसिस के अटैक के बाद बाबा रामदेव बिस्तर पर ही लेटे रहते थे। ऐसे में उन्होंने समय काटने के लिए किताबों का सहारा लिया। एक दिन उन्हें किसी ने पढने के लिए योग की किताब दी। इस किताब के पहले पन्ने पर लिखा था कि योग करने से मन और तन पर काबू पाया जा सकता है। फिर किया था, उन्होंने किताब में बताये गए तरीके से लगातार योग करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी बीमारी (पैरालिसिस) पर काबू पा लिया।

यही से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ। पैरालिसिस के अटैक के बाद से उनका मन स्कूल और पढ़ाई में नहीं लग रहा था। उनका झुकाव तो दिन प्रतिदिन योग की ओर बढ़ता जा रहा था। जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने खानपुर के गुरूकुल में एडमिशन लिया। यहीं पर उनकी मुलाकात आचार्य बालकृष्ण से हुई थी।

कभी साइकिल पर घर घर जा कर दवाईया बेचते थे बाबा रामदेव

गुरुकुल से अपनी शिक्षा ख़त्म करने के बाद बाबा रामदेव ने योग और आयुर्वेद को घर-घर पहुंचने का दृढ़ निश्चय किया। शुरूआती दिनों में बाबा गलियों में साइकिल पर च्यवनप्राश और अन्य आयुर्वेदिक दवाइयाँ बेचते थे।

बाबा रामदेव ने कैसे योग को घर-घर पंहुचाया

अपने गुरु शंकरदेव की गिरती सेहत की वजह से बाबा रामदेव ने दिव्य योग ट्रस्ट की जिम्मेदारी उठाई। इस दौरान वो और बालकृष्ण जी मिलकर योग शिविरों का भी आयोजन करते थे, साथ ही लोगों को भी योग के प्रति जागरूक करते थे।

साल  2000 के आसपास, बाबा रामदेव संस्कार चैनल पर  20 मिनट के शो पर योगा सिखाते हुए दिखाई देने लगे। एक साल के भीतर ही बाबा रामदेव संस्कार चैनल के अलावा आस्था चैनल, जी चैनल, सहारा चैनल और कई न्यूज़ चैनल्स पर योग के प्रोग्राम करने लगे, जिसके बाद बाबा रामदेव ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

पतंजलि कंपनी

सन 2006 में बाबा रामदेव ने अपने दोस्त आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की स्थापना की! शुरुवात में पतंजलि कम्पनी जड़ी बूटिया और आयुर्वेदिक दवाईया ही बेचती थी। फिर धीरे धीरे खाने-पीने की चीजों, सौन्दर्य प्रोडक्ट्स का निर्माण करती थी। और अब तो पतंजलि अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थ , आटा, घी, बिस्किट, मसाले, तेल, चीनी, जूस, शहद, जैसे कई छोटे बड़े प्रोडक्ट्स,का निर्माण करती है।

हर मुश्किल को पार करते हुए बाबा रामदेव ने ये बात सच कर दिखाई है कि

“लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”

Written By 

Usha Singh