मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श (सलाह) या मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श क्या है?

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मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श (सलाह) या मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श क्या है?

 

अंग्रेजी में कहा जाता है कि Take care of Your Body बिल्कुल सही कहा गया है. इसका अर्थ यह है कि "अपने शरीर का ख्याल रखें; यह एकमात्र ऐसा काम है, जो आप अपने पूरे जीवन के लिए करते हैं।" ध्यान रखने का अर्थ केवल बाहरी शरीर की देखभाल करना नहीं है, बल्कि इसका अर्थ यह है कि आप अपनी आंतरिक आत्मा, मस्तिष्क  और मन की भी देखभाल करें।

मानसिक स्वास्थ्य क्या है?

मानसिक स्वास्थ्य, हमारे मनोवैज्ञानिक (Psychological) के कल्याण का एक महत्वपूर्ण स्तर है, या यूँ कहूँ कि मानसिक बीमारी को दूर रखना इसका मुख्य उद्देश्य है। किसी भी व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक स्थिति हो सकती है। जो भावनात्मक और व्यवहारिक समायोजन के संतोषजनक स्तर पर काम कर रहा है।

सकारात्मक मनोविज्ञान या होलिज़्म के परिप्रेक्ष्य (दृष्टिकोण ) से, मानसिक स्वास्थ्य में व्यक्ति द्वारा जीवन का आनंद लेने की क्षमता शामिल हो सकती है, और जीवन की गतिविधियों और मनोवैज्ञानिक स्तर लचीलापन प्राप्त करने के प्रयासों के बीच एक संतुलन बना सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) WHO के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य में "जीव कल्याण, कथित आत्म-प्रभावकारिता, स्वशासन या अटॉनमी, कार्यक्षमता, पीढ़ीयों के बीच का अंतर और तरीके, बुध्दि संबधित और भावनात्मक जैसी भावनाएं शामिल हैं।" WHO के अनुसार “ किसी व्यक्ति की क्षमता उनकी कबिलियात पर आधारित होती है. जीवन के सामान्य तनाव, कार्य क्षमता और समाज में योगदान के साथ, सांस्कृतिक मतभेद, जीव आकलन और प्रतिस्पर्धात्मक व्यावसायिक सिद्धांत जैसे सभी महत्वपूर्ण विषय प्रभावित होते हैं।

आप सोच रहें  होगे कि "मानसिक स्वास्थ्य" कैसे परिभाषित किया जाता है और इसकी परिभाषा क्या है? यह "सलामती की एक स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास रहता है, वह जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, लाभकारी और उपयोगी रूप से काम कर सकता है और अपने समाज के प्रति योगदान करने में सक्षम होता है।

जब बाहरी शरीर की देखभाल करने की बात आती है, तो हम बेहद गंभीर होते हैं। लेकिन, जब मानसिक स्वास्थ्य की बात आती है, तो हम टाल-मटोल करते है।

परामर्श(counseling) के लिए क्यों जाएं?

युवा पीड़ी, कई अलग-अलग चीजों के लिए परामर्श का सहारा लेती हैं। कभी-कभी, युवा को ये भी बताया जाता है, कि परिवार के लोगों या दोस्तों से किसी तरह बात करें और अपनी बात को लोगों के सामने रखें और साथ ही उन्हें सपोर्ट पाने की ट्रेनिंग दी जाती है।

कठिनाइयों की एक विस्तृत श्रृंखला का अनुभव करने वाले युवा लोगों की सहायता करने के लिए काउंसिलिंग का गठन किया गया है , ये विशेष रूप से उन लोगों के लिए है. जो उदास या चिंतित रहते है. यहाँ पर युवाओं को कई मुद्दों पर परामर्श दिए जाते है.

• निराश और टेंशन में रहना

• आत्म सम्मान की कमी

• खुद को नुकसान पहुँचाना

• तंग किया जाना

• परिवार का टूटना, तलाक या अन्य कोई पारिवारिक समस्या

• तनाव

• दुष्कर्म

• सदमा (shock)

• गुस्से पर कंट्रोल न होना

• पैसे, शिक्षा और रोजगार सम्बंधित चिंताएं

हमारा मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य समान रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. जैसा कि यदि हम किसी मुसीबत में होते है, तो हमारा मस्तिष्क बचाव के लिए तुरंत सलाह देता हैं।

मानसिक स्वास्थ्य परामर्श कैसे मदद करता है?

मानसिक स्वास्थ्य पीड़ित लोगों के लिए अक्सर मनोचिकित्सा या " टॉक थेरेपी यानी बातचीत के जरिये मुश्किल से मुश्किल समस्‍याओं का हल ढूंढने की कोशिश की जाती है " – ये सभी उपयोगी होते हैं। आपके इलाज का तरीका  और समय आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियो और इनश्योरेंस पर निर्भर करता है, और ये आपकी चिकित्सा सम्पूर्ण उपचार योजना का हिस्सा हो सकता है। जिसमें दवा या अन्य उपचार विकल्प भी शामिल हैं।

काउन्स्लर से बात करने से, आप विचार, व्यवहार, चिंता, तनाव, हार, पिछले अनुभवों और अन्य समस्याओं से निपट सकते हैं। और आपको अपनी परेशानी से उभरने मदद कर सकते हैं। बेशक, व्यक्तिगत मुद्दों के बारे में एक चिकित्सक से बात करना कठिन हो सकता है, लेकिन यह जीवन की समस्याओं से सुलझाने में मदद कर सकता है। यह मुक्ति, आत्मसमान, अस्तित्व और विश्वास जैसी भावनाएं प्रदान कर सकता है।

 

थेरेपी आपकी मदद कर सकता है:

 

• चुनौतियों का मजबूती से सामना करना

• व्यवहार बदलें जो आपको पीछे की ओर खिचता है  

• सोचने के तरीके या नजरिया जो ये बताता है, कि आप कैसा महसूस कर रहें है

• अपने अतीत की दर्दनाक और बुरी यादों से उभारना

• रिश्ते मजबूत बनाना

• अपने लक्ष्यों को समझना

• अपने आत्मविश्वास को मजबूत करना

• समस्याओं से निपटना

• भय, दुःख या गुस्सा जैसी भावनाओं का मजबूती से सामना करना

• अपनी समस्या को सुलझाने के कौशल को बढ़ाना

तो इस के लिए, विचार विमर्श न करें , अपने मस्तिष्क का ख्याल रखें ठीक उसी तरह जैसे आप अपने शरीर की देखभाल करते है।

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Written By 

Usha Singh