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कोढ़ या कुष्ठ रोग क्यों कैसे और कब होता है?

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कुष्ठ रोग यह वह रोग है जिसमे रोगियों के शरीर पर सफ़ेद दाग़ पड़ते है और वह धीरे-धीरे बढ़ कर पुरे शरीर पर फ़ैल जाते है इससे कोढ़ भी कहते है| इस रोग को कुछ लोग छुत मानते है और इनसे दूर रहते है, कही उन्हें यह रोग ना हो जाए इस डर से| कुछ गाव तरफ आपको देखने मिलेगा कुष्ठ रोग वालो से हर कोई दूर रहता है इनके पास नहीं आना चाहते है और उनके आपने घर वाले उन्हें अलग रखते है उनका कमरा उनका सामान, हर वस्तु को अलग रखते है उनको भोजन भी दूर से ही दिया जाता है|

कुष्ठ रोग त्वचा को ही नहीं बल्कि यह नसों कि सतह, ऊपरी श्वास नलिका और आँखों को भी प्रभावित करता है| यदि इस रोग का इलाज ना किया जाए तो स्नायु (nerves) कमज़ोर और त्वचा भद्दी, स्थायी रूप से नसे क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, पैरों में सनसनाहट ख़त्म हो कर सुन्नता उत्पन हो सकती है|

इस रोग के बैक्टीरिया शरीर में धीरे धीरे विकसित होते है इसलिए शरीर में कुष्ठ रोग के लक्षण दिखाई देने में ज्यादा समय जाता है कहा जाता है कि 2 से 10 साल लग सकते है|

 

कुष्ठ रोग के लक्षण

मांसपेशी में कमज़ोरी

त्वचा मोटी, कठोर और शुष्क हो जाती है|

हाथों, बांहों, पैरों और पैर के तलवों में सुन्न होना|

त्वचा पर उभार

शरीर पर ऐसे घाव होना जिसे छूने पर दर्द का एहसास ना हो

पैरों के तलवे में अल्सर होना

शरीर के घाव का कई सप्ताह या महीनों तक ठीक न होना|

स्नायु (muscle) कमज़ोर होना और पक्षाघात होना|

आँखों में परेशानी और उसके कारण अंधेपन की समस्या होना|

 

सामान्य रूप से कुष्ठ रोग तीन प्रकार के होते हैं|

(Nerve leprosy) तंत्रिका कुष्ठ शरीर के प्रभावित अंगो की संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है| उस स्थान पर सुई या कुछ भी चुभने पर मनुष्य को किसी प्रकार का कोई दर्द महसूस नहीं होता है|

ग्रंथि कुष्ठ (Lapromatus leprosy) :-  शरीर के किसी भी भाग पर त्वचा से भिन्न रंग के धब्बे या चकत्ते पड़ जाते हैं और शरीर में गांठे निकल आती है|

मिश्रित कुष्ठ :- केवल ऐसे संक्रमित कुष्ठ रोगी जिनका बहुत दिनों से इलाज ना हुआ हो, ऐसे मनुष्य के संपर्क में आने से कुष्ठ फ़ैल सकता है| इस से पीड़ित लोग भी इलाज के 2 सप्ताह बाद ही संक्रामक नहीं रह जाते| यदि रोग अति संक्रामक स्थिति में हैं, तो परिचारक, कुष्ठ रोग की दवाओं का सेवन करके रोग मुक्त हो सकते है|

यह रोग ना तो वंशानुगत होता है न ही यौन-संपर्क के द्वारा फैलता है| व्यस्को के मुकाबले बच्चों में इस रोग के होने का खतरा अधिक होता है| अत: जो बच्चे कुष्ठ रोगियों के संपर्क में रहते हैं, उनको इस रोग से बचाव के लिए अधिक ध्यान देने की ज़रूरत होती है|

 

कुष्ठ रोग के उपचार

(WHO) वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने इस रोग का इलाज के लिए मल्टीड्रग थेरेपी विकसित की है| इसके साथ ही कुष्ठ रोग के इलाज के लिए रोगी को एंटीबायोटिक्स दी जाती है जो कुष्ठ रोग के बैक्टीरिया को मारने में मदद करती है| इसके अलावा अन्य दवाएं मरीजों को दी जाती है| कभी-कभी डॉक्टर मरीज़ को एक ही समय एक से अधिक एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देते हैं|

 

कुष्ठ रोग से बचाव के उपाए

कुष्ठ रोग के बचाव के लिए कोई विशेष दवा उपलब्ध नहीं है लेकिन बीसीजी (BCG) का टीका लगवाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है|

इस रोग के बारे में लोगों को जागरूक कर के इस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है|

कुष्ठ रोग का समय पर निदान और उपचार कराने से ही इस बीमारी से बचा जा सकता है ताकि कुष्ठ रोग किसी अन्य व्यक्ति में न फैले| इसके अलावा कुछ सावधानियां रख कर कुष्ठ रोग से बचाव किया जा सकता है|

इस रोग का इलाज तुरंत करा कर इससे बचाव किया जा सकता है|

 

Written By

Tabassum Shah