स्वस्थ रहने के लिए भरपूर नींद लें - वर्ल्ड स्लीप डे

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आज 15 मार्च 2019 वर्ल्ड स्लीप डे हैं| हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वर्ल्ड स्लीप डे मनाया जा रहा है| इस दिन के बारे में अधिकतर लोगों को जानकारी नहीं है, यह क्यों मनाया जाता है,  हर वर्ष इससे मनाने का उदेश्य है कि इसके बारे में जागरूकता लाया जा सके और सभी लोगों को इसकी जानकारी हो|

कम सोना या हद से ज़्यादा सोना दोनों ही नुकसानदेह हैं, किसी भी काम को हद से ज़्यादा करना या कम करना दोनों सूरतों में नुकसान पहुँचाता है| हर उम्र के साथ-साथ नींद को अलग-अलग भागों में बाटा गया है, जानिए किस उम्र में कितनी नींद लेनी चाहिए|

 

उम्र के हिसाब से नींद लेना

3 से 12 महीने के बच्चे :-  15 घंटे सोने चाहिए|     

1 से 3 साल के बच्चे   :-  12 से 14 घंटे|

3 से 5 साल के बच्चे   :-  11 से 13 घंटे|

6 से 12 साल की उम्र  :-  10 से 11 घंटे|

12 से 18 साल की उम्र :-  8 से 10 घंटे|

18 साल के ऊपर      :-  6 से 8 घंटे|

 

अच्छी नींद में आने वाली रुकावटे

एक सर्वे के मुताबिक पाता चला है, 58% लोगों का कहना है, “चिंता” नींद न आने का कारण बनती है| कुछ वयस्कों का कहना है सामान्य नींद के समय के साथ काम करने के आवर्स (घंटे) का बढ़ जाना नींद में आने वाली एक बड़ी बाधा है| 61% लोगों का कहना है कि किसी भी रोग के इलाज के दौरान उनकी नींद पर असर पड़ता है, वही 26% लोग अनींद्रा से और 21% खर्राटों की वजह से पीड़ित हैं|

 

अच्छी नींद न होने का प्रभाव

कुछ वयस्कों का कहना है, सही तरह से नींद पूरी न होने के कारण थकान व चिड़चिड़ा व्यवहार को ज़िम्मेदार मानते हैं|

 

नींद को प्राथमिकता नहीं

भारत में 66% लोग मानते है कि तंदुरुस्ती के लिए नींद से ज़्यादा व्यायाम (एक्सरसाइज) करना ज़रूरी है, जबकि डॉक्टरों का मानना है कि रोज़ाना 6 से 8 घंटे की नींद लेना ज़रूरी है| जबकि 67% लोगों ने अच्छी नींद की ज़रूरत महसूस की, लेकिन यह उनकी प्राथमिकता में शामिल नहीं था|

 

नींद की कमी से होने वाली बीमारियां

आँखों का लाल होना, आँखों में सुजन आना, चक्कर आना, आँखों के निचे काले दाग आना, आँखों में दर्द, सिर दर्द, डिप्रेशन, झुर्रियां, रिंकल्स, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, चिडचिडापन, किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव, मेटाबॉलिक स्ट्रेस का बढ़ना, आत्मविश्वास की कमी, दिल से संबधित रोग और मोटापा जैसी कई बीमारियां नींद पूरी ना होने की वजह से तेज़ी से बढ़ती हैं| खाना खाने के बाद 2 घंटे के अंदर सोने वालों में नींद संबंधी समस्याएं 50% अधिक होती है|

 

अच्छे स्वास्थ्य के लिए भरपूर नींद लेना

अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है पूरी नींद लेना| शरीर में रोगों से लड़ने वाली कोशिकाएं अच्छी तरह से काम करती है, मानसिक कोशिकाओं को मजबूती मिलती है, कार्यक्षमता बढ़ती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, याद्दाश्त बढ़ती है, शरीर में चुस्ती फुर्ती रहती है और ताजगी महसूस होती है|

 

अच्छी नींद के लिए, क्या ना खाएं

जंक फ़ूड सहेत के लिए हानिकारक है ही और इसे रात के समय गलती से भी ना खाएं| क्योंकि जंक फ़ूड खा कर चैन की नींद सोना थोड़ा असंभव है, जंक फ़ूड में सैचुरेटेड फैट होता है जिसे पचाने में काफी समय लगता है|

सोते समय पाचन क्षमता 50% तक धीमी हो जाती है| चिकन या किसी भी तरह की प्रोटीन वाली चीज़ रत में नहीं खाना चाहिए| अधिक प्रोटीन लेने के कारण सोने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाए, पाचन पर ध्यान देने लगता है| प्रोटीन के साथ कार्बोहाइड्रेट लेने से संतुलन बना रह सकता है|

रात में स्नैक्स खाने से बचे, प्रोसेस्ड फ़ूड में मोनोसोडियम ग्लूटेमेट की भरी मात्रा होती है जिससे अनींद्र की समस्या हो सकती है|

रात में जागने से बचे, जितना हो सके कोशिश करिए भरपूर नींद लेने की नींद पूरी होगी तो बीमारियो से दूर रहोगे और स्वस्थ रहोगे| अधिक सोना और कम सोना दोनों ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं|

 

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Written By

Tabassum Shah